Monday, September 21, 2020
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Uttar Pradesh: निजी स्कूलों ने की बच्चों की 20 फीसदी फीस माफ करने की घोषणा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में निजी स्कूलों ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने वाले अभिभावकों को शुक्रवार को फीस में बड़ी राहत दी। Lockdown के दौरान परिजनों को अपने बच्चों की स्कूलों की फीस का इंतजाम करने में बहुत मुश्किलें आ रही हैं। ऐसे में कोरोना वायरस के कारण आई आर्थिक स्थिति को देखते हुए यूपी के निजी स्कूलों ने बच्चों की 20 फीसदी तक फीस माफ़ करने का ऐलान किया है। कहा गया कि फीस में 20 फीसद की छूट होगी।  पुराने बच्चों से एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी। पर दाखिला लेने वाले बच्चों से ली जाएगी। स्कूल बंद रहने की अवधि मेंटीनेंस चार्जेज, लाइब्रेरी शुल्क नहीं ली जाएगी।

इस दौरान उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सीएमएस की अध्यक्ष डॉ. गीता गांधी ने कहा कि हम इस संकट की घड़ी में अभिभावकों के साथ हैं। हम बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देंगे। पर इस स्थिति में अभिभावकों को भी विद्यालयों की समस्याओं को समझना चाहिए।

निजी स्कूलों के साथ-साथ मिशनरी स्कूल ने भी अभिभावकों को दिया राहत

इस दौरान उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में निजी स्कूलों के साथ-साथ मिशनरी स्कूल ने भी अभिभावकों को राहत का फैसला किया है। इसके अलावा बच्चों से कंप्यूटर फीस भी नहीं ली जाएगी। एसोसिएशन के अनुसार इस छूट का लाभ सिर्फ उनको मिलेगा जो कोरोना काल में आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं। जैसे- जिनके वेतन में कटौती हुई हो या जिनका व्यापार प्रभावित हुआ हो। सरकारी कर्मचारियों या ऐसे लोगों को छूट नही मिलेगी जिनके काम पर लॉकडाउन का असर नहीं हुआ। जैसे जो लोग मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े हैं।

आपको बता दें जो ऐसे व्यापार करते हैं जिनको लॉकडाउन में बंद नही किया गया। ये व्यवस्था सिर्फ इसी सत्र के लिए की गई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया की ये छूट सिर्फ ऑनलाइन क्लासेज के दौरान ही दी जाएगी अर्थात कम से कम 6 महीने या फिर जब तक स्कूल में फिजिकल क्लास नही होती। उन्होंने बताया कि ये छूट निजी स्कूलों के साथ-साथ कई मिशनरी स्कूल, एंग्लो इंडियन स्कूल में भी दी जाएगी।

अभिभावक 10 अगस्त तक कर सकते है फीस जमा

एसोसिएशन में शामिल स्कूलों ने कहा कि अभिभावक 10 अगस्त तक अपने बच्चों की फीस जमा कर दें नहीं तो उनके बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज बन्द कर दी जाएंगी। ऐसे में इसकी जिम्मेदारी अभिभावकों की खुद की होगी। हालांकि इसमें भी केस टू केस फैसला किया जाएगा। यानी अगर कोई अभिभावक इतना मजबूर है कि वह छूट के बाद भी फीस नही दे सकता तो उसके लिए अलग से विचार किया जाएगा।

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